France Protest: महंगाई के खिलाफ फ्रांस में बड़ा विरोध प्रदर्शन, कई शहरों में तनाव; 135 लोग गिरफ्तार

पेरिस। फ्रांस में बढ़ती महंगाई आर्थिक असमानता और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति को लेकर लोगों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दिया। देश के विभिन्न शहरों में बड़ी संख्या में लोगों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। राजधानी पेरिस सहित कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बनी। हालात नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस और वाटर कैनन का सहारा लिया। फ्रांस के गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देशभर में लगभग 4.1 लाख लोग इन प्रदर्शनों में शामिल हुए। वहीं, ट्रेड यूनियनों ने प्रदर्शनकारियों की संख्या करीब 8 लाख होने का दावा किया। दोनों पक्षों के आंकड़ों में अंतर के बीच प्रदर्शन ने देश में महंगाई, आर्थिक विषमता और सरकारी सेवाओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर चल रही बहस को फिर तेज कर दिया।

पेरिस में मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प

राजधानी पेरिस में बड़ी संख्या में लोगों ने विरोध मार्च निकाला। पुलिस के अनुमान के मुताबिक, शहर में करीब 1.1 लाख प्रदर्शनकारी जुटे थे। मार्च की शुरुआत अपेक्षाकृत शांत रही, लेकिन अंतिम चरण में कुछ स्थानों पर स्थिति बिगड़ गई और पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव होने लगा। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों ने आंसू गैस के गोले छोड़े और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। कुछ जगहों पर पुलिस की ओर से बल प्रयोग किए जाने की भी खबर सामने आई। पेरिस के अलावा ल्योन, मार्सिले, बोर्डो, लिली और नांत जैसे शहरों में भी विरोध प्रदर्शन के दौरान तनाव देखने को मिला। मार्सिले में कुछ प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर धातु की चादरें रखकर आवागमन बाधित किया। वहीं, कुछ इलाकों में कूड़ेदानों में आग लगाने और दंगा नियंत्रण पुलिस पर पत्थर व बोतलें फेंकने की घटनाएं सामने आईं।

सुरक्षा व्यवस्था के लिए 70 हजार जवान तैनात

पिछले सप्ताह हुई हिंसा, लूटपाट और तोड़फोड़ की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए फ्रांस के प्रशासन ने इस बार सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की थी। देशभर में लगभग 70 हजार पुलिसकर्मियों और जेंडरमेरी के जवानों को तैनात किया गया। यह संख्या पिछले सप्ताहांत की तैनाती से करीब 10 हजार अधिक बताई गई। फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज के मुताबिक, शनिवार दोपहर तक प्रदर्शन के सिलसिले में 135 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका था। सुरक्षा बलों की तलाशी के दौरान पटाखे, धातु की गेंदें और अन्य ऐसी वस्तुएं भी मिलीं, जिनका इस्तेमाल हिंसक गतिविधियों में किया जा सकता था। प्रशासन की प्राथमिकता प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचने और हिंसा की घटनाओं को रोकना था।

पेरिस में संग्रहालय बंद, मेट्रो सेवाओं पर भी असर

प्रदर्शन को देखते हुए पेरिस में कई एहतियाती कदम उठाए गए। सुरक्षा कारणों से लौवर और म्यूजियम द'ओर्से जैसे प्रमुख संग्रहालय बंद रखे गए। इसके अलावा, शहर के 20 से अधिक मेट्रो स्टेशन भी बंद किए गए, जिससे यात्रियों की आवाजाही प्रभावित हुई। संभावित तोड़फोड़ से बचाव के लिए कई दुकानदारों ने अपनी दुकानों के सामने लकड़ी के तख्ते लगा दिए। इससे शहर के कुछ व्यस्त इलाकों में सामान्य गतिविधियों पर भी असर पड़ा। प्रशासन ने प्रदर्शन मार्च के निर्धारित मार्ग में भी बदलाव किया। पहले मार्च को शहर के केंद्र में स्थित बास्तील से शुरू होना था, लेकिन बाद में इसे राजधानी के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित पोर्त द'इटली स्थानांतरित कर दिया गया। ट्रेड यूनियनों ने प्रशासन के इस फैसले पर आपत्ति जताई। यूनियन के एक प्रतिनिधि ने इसे शर्मनाक बताते हुए आरोप लगाया कि इस तरह के निर्णय से लोगों के विरोध प्रदर्शन करने के अधिकार पर असर पड़ सकता है।

महंगाई और आर्थिक असमानता को लेकर बढ़ी नाराजगी

फ्रांस में हुए इन प्रदर्शनों के पीछे बढ़ती कीमतों, आर्थिक असमानता और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति को लेकर लोगों की नाराजगी प्रमुख मुद्दे रहे। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के सामने अपनी मांगें रखने के लिए सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज कराया। दूसरी ओर, पिछले सप्ताह की हिंसक घटनाओं के बाद प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए व्यापक इंतजाम किए। कई शहरों में हुई झड़पों और गिरफ्तारियों ने सरकार के सामने सार्वजनिक सुरक्षा तथा शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी खड़ी की। फिलहाल, इन प्रदर्शनों ने फ्रांस में आर्थिक दबाव और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े मुद्दों पर जारी असंतोष को प्रमुखता से सामने ला दिया है।

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