कभी नक्सल हिंसा और बारूद की गंध के लिए चर्चा में रहने वाला बस्तर अब अपनी नई पहचान गढ़ रहा है। अब यहां की हवा में बंदूक और धमाकों की नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे महंगे आमों में शामिल मियाज़ाकी आम की खुशबू घुल रही है। बस्तर के एक किसान की चार साल की मेहनत ने साबित कर दिया है कि यदि इरादे मजबूत हों तो मिट्टी भी सोना उगल सकती है।
दुनिया का सबसे महंगा आम, जिसकी कीमत सुनकर रह जाएंगे हैरान
जापान में उगाया जाने वाला मियाज़ाकी आम दुनिया के सबसे महंगे फलों में गिना जाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत लगभग 2.5 लाख से 3 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच जाती है। यही वजह है कि इसे "एग्स ऑफ सनशाइन" यानी सूरज के अंडे भी कहा जाता है।
इस आम का रंग सामान्य पीले आमों से बिल्कुल अलग होता है। पकने के बाद इसका रंग गहरा लाल और बैंगनी आभा लिए होता है, जो इसे बेहद आकर्षक बनाता है। स्वाद की बात करें तो यह आम बेहद मीठा, रसीला और सुगंधित होता है।
आखिर इतना महंगा क्यों है मियाज़ाकी आम?
मियाज़ाकी आम की कीमत सिर्फ उसके स्वाद की वजह से नहीं है। इसे उगाने की प्रक्रिया बेहद कठिन और वैज्ञानिक होती है। हर फल को विशेष देखभाल, नियंत्रित तापमान, पर्याप्त धूप और पोषण दिया जाता है। फल को पेड़ पर ही जालीदार बैग में रखा जाता है ताकि वह सुरक्षित रहे और समान रूप से विकसित हो सके। इसकी सीमित पैदावार और अंतरराष्ट्रीय मांग भी इसकी कीमत को आसमान तक पहुंचा देती है।
सेहत का खजाना है यह विदेशी आम
विशेषज्ञों के अनुसार मियाज़ाकी आम सिर्फ स्वाद में ही नहीं, बल्कि पोषण के मामले में भी बेहद खास है। इसमें विटामिन-ए, विटामिन-सी, विटामिन-ई, एंटीऑक्सीडेंट और प्राकृतिक शर्करा भरपूर मात्रा में पाई जाती है।
इसके सेवन से आंखों की रोशनी बेहतर रखने, त्वचा को स्वस्थ बनाने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और शरीर को ऊर्जा देने में मदद मिलती है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने का काम करते हैं।
बस्तर के किसान ने कर दिखाया कमाल
बस्तर के किसान संपत झा ने चार साल पहले मियाज़ाकी आम के तीन पौधे अपने खेत में लगाए थे। उस समय शायद ही किसी ने सोचा होगा कि जापान का यह दुर्लभ फल एक दिन बस्तर की धरती पर लहलहाएगा। लगातार देखभाल, मेहनत और धैर्य के बाद अब इन पौधों में फल आने शुरू हो गए हैं।
किसान का कहना है कि बस्तर की जलवायु और मिट्टी ने इस विदेशी फल को अपनाया है। अब पेड़ों पर लग रहे मियाज़ाकी आम यह साबित कर रहे हैं कि बस्तर सिर्फ प्राकृतिक संसाधनों का क्षेत्र नहीं, बल्कि उच्च मूल्य वाली बागवानी का भी नया केंद्र बन सकता है।
बस्तर की नई पहचान बन सकता है मियाज़ाकी आम
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस आम की व्यावसायिक खेती को बढ़ावा दिया जाए तो यह किसानों की आय में कई गुना वृद्धि कर सकता है। जिस क्षेत्र को कभी संघर्ष और पिछड़ेपन के नजरिए से देखा जाता था, वही क्षेत्र अब दुनिया के सबसे महंगे फलों की खेती कर नई मिसाल पेश कर रहा है।
बारूद से खुशबू तक का सफर
बस्तर की पहचान बदल रही है। कभी जिस धरती पर हिंसा की खबरें सुर्खियां बनती थीं, आज वहीं से करोड़ों की संभावनाएं पैदा करने वाली खेती की कहानी सामने आ रही है। मियाज़ाकी आम केवल एक फल नहीं, बल्कि यह बस्तर के बदलते स्वरूप, किसानों की मेहनत और नई संभावनाओं का प्रतीक बन चुका है। आने वाले वर्षों में यह आम बस्तर को अंतरराष्ट्रीय फल मानचित्र पर नई पहचान दिला सकता है।