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महंगाई की नई चोट: पेट्रोल-डीजल से लेकर एसी और सब्जियों तक हर चीज के बढ़े दाम...

महंगाई की नई चोट: पेट्रोल-डीजल से लेकर एसी और सब्जियों तक हर चीज के बढ़े दाम...

रायपुर। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ने लगा है। अंतरराष्ट्रीय हालात बिगड़ने के साथ ही पेट्रोल-डीजल, एलपीजी गैस, खाने का तेल, सब्जियां, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स और मकान निर्माण सामग्री के दाम तेजी से बढ़ गए हैं। राजधानी रायपुर सहित पूरे प्रदेश में महंगाई ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कच्चे तेल और अन्य आयातित उत्पादों की कीमतों में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही तो आने वाले दिनों में महंगाई और बढ़ सकती है। परिवहन खर्च बढ़ने से रोजमर्रा की जरूरतों की लगभग हर वस्तु महंगी हो रही है।

रसोई गैस और डीजल ने बिगाड़ा घर का बजट

सबसे ज्यादा असर एलपीजी गैस और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से देखने को मिल रहा है। कमर्शियल गैस सिलेंडर और छोटे घरेलू सिलेंडरों के दाम बढ़ने से होटल, ढाबे और फूड कारोबारियों ने खाने-पीने की चीजों के रेट बढ़ा दिए हैं। अब समोसा और कचौड़ी 15 से 20 रुपए में बिक रहे हैं, जबकि पहले इनकी कीमत 10 से 15 रुपए थी। सांभर बड़ा, दोसा और अन्य दक्षिण भारतीय व्यंजनों के दाम भी बढ़ गए हैं। होटल और रेस्टोरेंट में थाली का खर्च 20 से 30 फीसदी तक बढ़ चुका है। केटरिंग कारोबार से जुड़े व्यापारियों के मुताबिक शादी समारोहों में भोजन की लागत में भी भारी बढ़ोतरी हुई है। पहले 400 रुपए में मिलने वाली थाली अब 500 रुपए से ऊपर पहुंच गई है।

दूध, दही और पनीर के दाम में उछाल

दूध की कीमतों में वृद्धि के बाद डेयरी उत्पाद भी महंगे हो गए हैं। दही और पनीर के दामों में 20 से 40 रुपए तक की बढ़ोतरी हुई है। कई दुकानों में पनीर अब 480 रुपए किलो तक बिक रहा है।

खाने के तेल ने बढ़ाई रसोई की चिंता

रोजाना इस्तेमाल होने वाले सोया तेल और राइस ब्रान तेल के दाम में 25 से 30 रुपए प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सोया तेल जो पहले 130 रुपए लीटर मिलता था, अब 160 रुपए तक पहुंच गया है। वहीं राइस ब्रान तेल भी 155 रुपए लीटर बिक रहा है। व्यापारियों के अनुसार आयात लागत बढ़ने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता के कारण खाद्य तेल महंगे हुए हैं।

प्लास्टिक और पैकिंग सामग्री भी महंगी

प्लास्टिक उद्योग पर भी महंगाई की मार साफ दिखाई दे रही है। प्लास्टिक दाने और स्क्रैप के दाम बढ़ने से पैकिंग सामग्री, पाउच और सिंगल यूज प्लास्टिक उत्पाद 20 से 50 फीसदी तक महंगे हो गए हैं। इसका असर दूध, दही, नमकीन और अन्य पैक्ड उत्पादों की कीमतों पर भी पड़ा है।

मकान बनाना हुआ और महंगा

सीमेंट, सरिया, गिट्टी और रेत के दाम बढ़ने से मकान निर्माण की लागत में भारी वृद्धि हुई है। पहले जहां निर्माण का खर्च 1200 से 1300 रुपए प्रति वर्ग फीट आता था, वहीं अब यह बढ़कर 1400 से 1500 रुपए प्रति वर्ग फीट तक पहुंच गया है। निर्माण कारोबारियों का कहना है कि उद्योगों को गैस और कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित होने से सरिया और अन्य निर्माण सामग्री के दाम बढ़े हैं।

एसी, फ्रिज और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के बढ़े दाम

कॉपर और अन्य धातुओं की कीमत बढ़ने से एसी, फ्रिज, वाशिंग मशीन और बिजली के तारों के दामों में भी बढ़ोतरी हुई है। बाजार में एसी की कीमतें करीब 20 फीसदी तक बढ़ चुकी हैं। 40 हजार रुपए में मिलने वाला एसी अब लगभग 48 हजार रुपए में बिक रहा है। बिजली के कॉपर तारों की कीमतों में भी तेज उछाल आया है। पंखे, कूलर और अन्य इलेक्ट्रिक उपकरण भी महंगे हो गए हैं।

कपड़ा बाजार पर भी दिखा असर

कपड़ा कारोबारियों के अनुसार कच्चे माल की कमी और आयात लागत बढ़ने के कारण कपड़ों की कीमतों में 20 से 25 फीसदी तक का इजाफा हुआ है। इसका असर शादी और त्योहारों की खरीदारी पर भी दिखाई दे रहा है।

सब्जियों के दाम आसमान पर

गर्मियों और बढ़े परिवहन खर्च के कारण सब्जियों के दामों में भी आग लगी हुई है। टमाटर 40 से 50 रुपए किलो, फ्रेंच बींस 160 रुपए किलो और हरी मिर्च 80 रुपए किलो तक बिक रही है। नींबू, करेला, भिंडी और अन्य सब्जियों की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिससे आम आदमी का मासिक बजट बिगड़ता जा रहा है।

आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है महंगाई

व्यापार और बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय तनाव लंबे समय तक जारी रहा तो ईंधन और आयातित वस्तुओं की कीमतों में और उछाल आ सकता है। इसका सीधा असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ेगा।


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