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  • आदिवासी नायक बिरसा मुंडा जयंती: झारखंड आज ही के दिन बना था भारत का 28वां राज्य, जानें इतिहास

    आदिवासी नायक बिरसा मुंडा जयंती: झारखंड आज ही के दिन बना था भारत का 28वां राज्य, जानें इतिहास

    Tribal Hero Birsa Munda Birth Anniversary: आदिवासी नायक बिरसा मुंडा की आज जयंती (जन्मदिन) है। 15 नवंबर को यानी आज ही के दिन झारखंड (Jharkhand) भारत का 28वां राज्य बना था। झारखंड में सर्वाधिक जंगली क्षेत्र हैं, इसलिए इसका नाम झारखंड रखा गया। जिसमें झार का आर्थ जंगल को दर्शाता है तो वहीं खंड का अर्थ टुकड़ा को दर्शाता है। झारखंड अपने नाम के अनुसार ही मूल रूप से एक वन क्षेत्र है। झारखंड राज्य (State of Jharkhand.) में सबसे ज्यादा खनिज पाया जाता है।

    झारखंड की स्थापना

    मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वर्ष 1930 में आदिवासी महासभा ने जयपाल सिंह मुंडा की अगुआई में अलग झारखंड का सपना देखा था। उनका यह सपना वर्ष 2000 में पूरा हुआ। केंद्र सरकार ने आदिवासी नायक बिरसा मुंडा के जन्मदिन पर बिहार के दक्षिणी हिस्से को विभाजित कर झारखंड को भारत का 28वां राज्य बना दिया।

    क्या है झारखंड का इतिहास

    झारखंड का इतिहास बहुत पुराना है। भारतीय हॉकी टीम के कप्तान जयसिंह मुंडा ने 1939 में वर्तमान बिहार राज्य के दक्षिणी जिलों के कुछ हिस्सों को मिलकार एक नया राज्य बनाने का मत रखा था। भारतीय हॉकी टीम के कप्तान जयसिंह मुंडा के यह सपना 2 अक्टूबर 2000 को साकार हुआ, क्योंकि 2 अक्टूबर को संसद में झारखण्ड को अलग राज्य का दर्जा देने का बिल पास हो गया था। इसी वर्ष झारखंड 15 नवंबर 2000 को भारत का 28वां राज्य बन गया।

    झारखंड की राजधानी रांची बनी

    आपको जानकारी के लिए बता दे कि झारखंड को झरनों का शहर भी कहा जाता है। क्योंकि झारथंड में झरना एवं जलप्रपात बहुत ज्यादा हैं। झारखंड की राजधानी रांची को बनाया गया, क्योंकि रांच राज्य का तीसरा सबसे प्रसिद्ध शहर है।

    झारखंड राज्य में कौन-कौन सी यूनिवर्सिटी हैं

    * सिद्धू कान्हू यूनिवर्सिटी (दुमका)

    * रांची यूनिवर्सिटी (रांची)

    * विनोबा भावे यूनिवर्सिटी (हजारीबाग)

    * बिरसा कृषि यूनिवर्सिटी (रांची)

    * बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान मेसरा (रांची)

    * कोलाहन यूनिवर्सिटी (चाईबासा)

    * नीलांबर पीतांबर यूनिवर्सिटी मेदिनीनगर एवं पालमू आदि।

    झारखंड में औद्यौगिक 3 संस्थान

    * भारतीय इस्पात प्रधिकरण

    * हेवि इंजिनयररिंग कारपोरेशन

    * मेकन

    और भी...

  • नोबेल जीतने वाले एशिया के पहले वैज्ञानिक सर चंद्रशेखर वेंकटरमन का आज ही के दिन हुआ था जन्म

    नोबेल जीतने वाले एशिया के पहले वैज्ञानिक सर चंद्रशेखर वेंकटरमन का आज ही के दिन हुआ था जन्म

    Sunday Special: इतिहास के पन्नों में 7 नवंबर की तारीख भारत के एक महान वैज्ञानिक के जन्मदिन के तौर पर दर्ज है। आज विज्ञान (Science) के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize) जीतने वाले एशिया (Asian) के पहले वैज्ञानिक सर चंद्रशेखर वेंकटरमन (great scientist Sir Chandrasekhar Venkataraman) का जन्म हुआ था।

    7 नवंबर 1888 को तमिलनाडु (Tamil Nadu) के तिरूचिरापल्ली (Tiruchirappalli) में जन्में वैज्ञानिक सर चंद्रशेखर वेंकटरमन को प्रकाश परावर्तन के क्षेत्र (reflection of light) में उनकी खोज के लिए 1930 में भौतिक शास्त्र (Physics) के नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया था।

    मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, वैज्ञानिक सर चंद्रशेखर वेंकटरमन ने वक्त अपनी यह अद्भुत खोज की वह भारत की आजादी से पहले का कठिनाइयों से भरा दौर था। और प्रयोग करने के लिए आधुनिक यंत्रों और प्रयोगशालाओं का नितांत अभाव था। लेकिन तमाम मुश्किलों के बावजूद विज्ञान के प्रति सर चंद्रशेखर वेंकटरमन का रुझान उन्हें विश्व के शीर्ष सम्मान तक ले गया।

    युवा विज्ञानी ने शिक्षार्थी के रूप में कई महत्त्वपूर्ण कार्य किए। युवा विज्ञानी चंद्रशेखर वेंकटरमन का 1906 में आपका प्रकाश विवर्तन पर पहला शोध पत्र लंदन की फिलसोफिकल पत्रिका में प्रकाशित हुआ था। उसका शीर्षक 'आयताकृत छिद्र के कारण उत्पन्न असीमित विवर्तन पट्टियां' था।

    जब प्रकाश की किरणें किसी छिद्र में से अथवा किसी अपारदर्शी वस्तु के किनारे पर से गुजरती हैं तथा किसी पर्दे पर पड़ती हैं, तो किरणों के किनारे पर मद-तीव्र अथवा रंगीन प्रकाश की पट्टियां दिखाई देती है। यह घटना विवर्तन' कहलाती है। विवर्तन गति का सामान्य लक्षण है। इससे पता चलता है कि प्रकाश तरगों में निर्मित है।

    और भी...

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